क्या आपके पास कार या बाइक है, अगर है तो उसका इंश्योरेंस जरूर होगा । क्या आपको पता है इंश्योरेंस लेते समय हम लोग बहुत सी गलती कर देते है। जिसे बाद में अगर आपको कभी क्लेम करना हो तो बहुत से परेशानियां आती हैं और आपके बहुत पैसा खर्च हो जाता हैं । तो चलिए आज आपको इंश्योरेंस लेते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर आपको पूरा पैसा मिले ।
इंश्योरेंस पॉलिसी दो प्रकार का होता हैं। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस और कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस। चलिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या है जाने अगर आपकी गाड़ी से किसी दूसरे इंसान, गाड़ी या किसी दूसरे की प्रॉपर्टी को नुकसान होता हैं तो इसका खर्चा इंश्योरेंस कंपनी उठाती है। इसमें आपकी गाड़ी का नुकसान का खर्च आपको नहीं मिलेगा।
कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में जो मिलता हैं वह तो मिलेगा इसके अलावा आपका अपनी गाड़ी का एक्सीडेंट , चोरी , आग या नेचुरल कैलेमिटी जैसे बाढ़, भूकंप से होने वाले नुकसान का खर्च इंश्योरेंस कंपनी उठाती है। यह सबसे बढ़िया इंश्योरेंस होता हैं।

हमेशा इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय IDV को चेक करना जरूरी है। IDV का मतलब है आपका गाड़ी का वर्तमान मार्केट वैल्यू। अगर आपकी गाड़ी किसी एक्सीडेंट में पूरी तरह डैमेज हो जाती हैं। या चोरी हो जाती है इंश्योरेंस कंपनी इतना ही पैसा देगा जितना आपके गाड़ी की वैल्यू है।
प्रीमियम कम करने की चक्कर में IDV को बहुत कम मत सेट करिए और इसे बहुत ज्यादा भी न करिए।

अगर आपने पिछले साल कोई क्लेम नहीं किया तो आपके NCB (No Claim Bonus) मिलता है । जो कि 20% से 50% तक भी हो सकता है। पॉलिसी रिन्यू करते वक्त NCB डिस्काउंट मांगना न भूलिए ।अगर आप गाड़ी बेचकर नई गाड़ी ले रहे हो तो आप नई गाड़ी का इंश्योरेंस में भी अपना NCB ट्रांसफर कर सकते हो ।
कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस के साथ कुछ एक्स्ट्रा पैसा देकर आप ऐड-ऑन ले सकते है। एक्सीडेंट के समय प्लास्टिक ,रबर या फाइबर की वैल्यू नहीं कटता आपको पूरा पैसा मिलता हैं।नई गाड़ी के लिए ऐड ऑन बहुत जरूरी है।
कभी इंजन में पानी भरने की वजह से इंजन खराब हो जाती है तो आम पॉलिसी इसे कवर नहीं करता लेकिन ऐड ऑन इसे कवर करते हैं। रोड पर गाड़ी खराब , पंचर ठीक करने या फ्यूल डिलीवरी की सुविधा मिलती है।

इंश्योरेंस कंपनी का किन किन कैशलेस गैराज के साथ टाई अप है ये जरूर चेक करिए ।अगर आपके घर के पास यह आपकी गाड़ी की कंपनी का वर्कशॉप उनके नेटवर्क में हैं तो एक्सीडेंट के वक्त जब आप क्लेम करोगे तो आपके जेब से पैसा नहीं देना पड़ेगा ।
कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेशियो जितना ज्यादा होगा उतना ही अच्छा , यह रेशियो बताता है कि कंपनी 100 क्लेम में से कितना क्लेम पास किया । कोशिश करिए हमेशा 95% से ऊपर CSR वाली कंपनी को ही चुनिए ।

अनिवार्य डिडक्टिबल यह एक फिक्स अमाउंट होती है जो हर क्लेम के वक्त आपको देना ही हैं , IRDAI के मुताबिक । यह वह पैसा है जो आप खुद चुनते हो कि मैं क्लेम के समय इतना पैसा अपनी जेब से दूंगा । इसे आप बढ़ाने पर आपका प्रीमियम तो कम हो जाता है। लेकिन एक्सीडेंट के वक्त आपका खर्चा बढ़ जाता है । इसे आप ठीक से सोच समझकर ही चुने ।
पॉलिसी के नियम और शर्तें (Terms and Conditions) को हमेशा ध्यान से पढ़ें। शराब पीकर गाड़ी चलाने पर या बिना ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) के दुर्घटना होने पर कोई भी इंश्योरेंस कंपनी क्लेम नहीं देती है। ऑनलाइन पर अलग-अलग कंपनियों के इंश्योरेंस चेक करें कौन आपको जरूरत के हिसाब से अच्छी पॉलिसी दे रहा हैं उसके बाद ही सही फैसला लें।

