दुनिया की करेंसी मार्केट जिसे फॉरेक्स मार्केट कहा जाता है। किसी देश का करेंसी डॉलर के मुकाबले गिरना एक बेहद गहरी बात हैं। इसको समझने के लिए हमें इसके हर पहलू को गहराई से देखना होगा ।
पहले जमाने में करेंसी की कीमत सोना से तय होती थी । जिसे गोल्ड स्टैंडर्ड कहते हैं। लेकिन आज के दौर में बहुत से देशों में Floating Exchange Rate चलता है।

इसका मतलब मार्केट की डिमांड और सप्लाई के ऊपर करेंसी का कीमत बढ़ती घटती है।
जब बाहर का देश आपके देश से सामान खरीदते हैं या आपके देश में घूमने आते है। उन्हें रुपयों या उस देश की करेंसी की जरूरत होती है । तब वह लोग बैंक में डॉलर देकर करेंसी लेते हैं, और उस करेंसी की कीमत बढ़ती है।
जब आपके देश से लोग बाहर से समान खरीदने के लिए डॉलर खरीदते हैं, तो आपकी करेंसी की मार्केट में सप्लाई बढ़ जाती हैं तब करेंसी का कीमत घट जाती है।
किसी देश की करेंसी डॉलर के मुकाबले ज्यादा गिर जाता है।इसके पीछे बहुत से कारण होते हैं।
हर कोई देश बाहर से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट करता है। मान लें कि कोई देश विदेश में $10 Billion का सामान बेचता है और $15 Billion का सामान खरीदता है । जो बाकी $5 Billion का फर्क होता हैं उसे US डॉलर में पे करना पड़ेगा इसके लिए देश को मार्केट से डॉलर खरीदना पड़ेगा और करेंसी का कीमत घट जाएगा ।

जब किसी देश के सरकार कमाई से ज्यादा खर्च करते हैं, तो वे दूसरे देशों से लोन लेते हैं या वे ज्यादा नोट छापता है इसके कारण मार्केट में ज्यादा नोट आने लगता हैं और करेंसी की कीमत घट जाती हैं।
इन्वेस्टर जो आपके देश में इन्वेस्ट करते हैं उन्हें सबसे ज्यादा डर सुरक्षा को लेकर होता है । अगर आपके देश में ऐसा कोई घटना घटती है जो इन्वेस्टर्स को डरा दे , तो कोई भी नया इन्वेस्टर्स आपके देश में इन्वेस्ट नहीं करना चाहेगा। जो भी वर्तमान इन्वेस्टर हैं , वे भी अपना बिजनेस बंद करके डॉलर लेकर चले जाएंगे । इससे भी करेंसी का कीमत घटती है।
किसी देश का करेंसी जब गिरता है तो उसे देश के हर छोटे-बड़े इंसान को दिक्कत होती है। देश में महंगाई बढ़ती हैं और देश के ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ता है। बाहर पढ़ने और घूमने जाने वाले लोगों को अचानक खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

हाँ , कुछ मामलों में करेंसी गिरने का फायदे भी होते हैं । अगर पहले आप के देश के समान $1 में 1 मिलता था तो पैसे की कीमत गिरने से वोही सामान $1 में दो मिलेगा । मतलब देश का सामान सस्ता हो जाता है और बाहर के लोग ज्यादा खरीदते हैं।
जो लोग देश के बाहर काम करते हैं वह अगर अपने घर में पैसा भेजेंगे तो उनके घर वालों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे मिलते हैं ।
करेंसी की गिरावट रोकने के लिए देश का सेंट्रल बैंक जिसे हमारा RBI अपने पास रखा हुआ डॉलर Foreign Exchange Reserves मार्केट में बेचना शुरू कर देता है

ताकि डॉलर की सप्लाई बढ़े जिससे डॉलर थोड़ा सस्ता हो जाए ।
